इस महाविद्यालय की स्थापना वर्ष 1957 में हुई थी । यह तब स्नातकोत्तर बुनियादी प्रशिक्षण महाविद्यालय (Post Graduate Basic Training College) के नाम से जाना जाता था । यह मध्यप्रदेश के प्राचीनतम महाविद्यालयों में से एक है ।
महाविद्यालय अकादमिक शोध एवं अन्य गतिविधियों में मध्यप्रदेश के शिक्षा महाविद्यालयों में ख्यातिलब्ध एवं प्रतिष्ठित माना जाता है ।
यह संस्था शिक्षकों की बेहतरी के साथ – साथ शैक्षिक नवाचार, शिक्षक शिक्षक समर्थन, शोध, अकादमिक विकास हेतु विख्यात है ।
सत्रह महाकाव्यों के रचयिता श्री कृष्ण ‘सरल’ ने इस महाविद्यालय में 15 वर्षों तक अध्यापन कार्य किया था ।
महाविद्यालय में गुणवत्तापूर्ण संचालित पाठ्यक्रम निम्नानुसार है –
बी. एड. नियमित 170
एम. एड. नियमित 20
बी. एड. भोज मुक्त वि. वि. 50
महाविद्यालय में शोध संबंधी गतिविधियों का संचालन “प्रगत शिक्षा अनुसंधान केंद्र” (Centre For Advanced Research in Education) के अंतर्गत संचालित है ।
शिक्षा की नवीन योजनाओं पर निरंतर शोध संस्था में सम्पन्न किए जाते है ।
पर्यावरण विकास
महाविद्यालय में विद्यावन का विकास वन विभाग द्वारा किया गया है और महाविद्यालय परिसर में लगभग 1800 पौधों का रोपण किया गया है ।
आम, आँवला एवं अमरूद के 100 पौधे रोपण की योजना आगामी सत्र हेतु प्रस्तावित है ।
नवाचार
विद्यार्थियों के मानसिक उन्नयन हेतु प्रति गुरुवार गुरु सभा का अभिनव आयोजन विद्यार्थियों का विशिष्ट व्यक्तियों के साम्मुख्य । यह मध्यप्रदेश का एकमात्र महाविद्यालय है जहाँ यह आयोजन होता है ।
इंटरनेट संयोजन ग्रंथालय मे कर शोधार्थीयों एवं विद्यार्थियों को लाभ देना ।
महाविद्यालय के शोध अध्ययन केंद्र को समृद्ध बनाने के लिए विभिन्न शोध पत्रिकाएं मंगवाना ।
उपलब्धियाँ